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Important Questions and Answers On GST

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Dated: 28-01-2017

 

By: P.C. Verma
Former Deputy Commissioner,
Commercial Taxes Department,
Jaipur (Rajasthan)

गुड्स एवं सर्विस टैक्स के संबंध में प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्न एवं उनके उत्तर


प्रश्न-1

माल के निर्यात (export of goods) की परिभाषा को समझाइये।

उत्तर

धारा २(४३) के अनुसार, माल का निर्यात से आशय माल को भारत से भारत के बाहर के किसी स्थान पर ले जाना होता है।

 

 

प्रश्न-2

सेवा के निर्यात (export of service) पर प्रकाश डालिये?

उत्तर

धारा २(४४) के अनुसार, किसी सेवा की आपूर्ति, सेवा के निर्यात के रूप में मानी जायेगी, जब
            (क) सेवा का आपूर्तिकर्ता भारत में स्थित है।
            (ख) सेवा का प्राप्तकर्ता भारत के बाहर स्थित है।
            (ग) सेवा की आपूर्ति का स्थान भारत के बाहर है।
            (घ) ऐसी सेवा के लिए भुगतान सेवा की आपूर्तिकर्ता द्वारा कन्र्वटेबल विदेशी मुद्रा (in convertible foreign exchange) में प्राप्त किया है, और
            (ड़) सेवा का आपूर्तिकर्ता (supplier of service) और सेवा का प्राप्तकर्ता (Recipient of service) केवल सुभिन्न व्यक्ति का स्थापन (merely establishments of a distinct persons) नहीं है।
            Explanations - for the purposes of persons in India and any of his other establishment outside India shall be treated as establishments of distinct persons.

   

प्रश्न-3

जीएसटी मॉडल लॉ, 2016 में दी गई ‘‘माल’’ (Goods) की परिभाषा को विस्तार से समझाइयें?

उत्तर

धारा 2(48) में ‘‘माल’’ की निम्न परिभाषा दी गई है-
            2(48) ‘‘माल’’ से एक्सनेबल क्लेम और धन (Actionable claim and money) के अतिरिक्त सभी प्रकार की चल सम्पत्ति (movable property) अभिप्रेत है, किन्तु इसके अंतर्गत प्रतिभूति, उगती फसल, घास और भूमि से संलग्न या का भाग होने वाली चीजे है, जो आपूर्ति के पूर्व या आपूर्ति की संविदा के धीन पृथक किये जाने के लिये करारित है,
            स्पष्टीकरण - इस खण्ड के प्रयोजन के लिये, शब्द ‘‘चल सम्पत्ति’’ के अन्तर्गत कोई अमूर्त सम्पति (Intangible property) नहीं होगी।
            ‘‘माल’’ की उपरोक्त परिभाषा के अनुसार, Actionable claim ‘माल’ नहीं है।  ‘‘माल’’ की परिभाषा में ‘‘धन’’ (money) को भी शामिल नहीं किया गया है। ‘धन’‘मुद्रा’ बैंक नोट, सिक्के और साधारण चलन का अन्य परिचालन माध्यम है जो मूल्य का प्रतिनिधित्व करता है। यह विनिमय की वह कीमत है जिसके बदले माल या सम्पत्ति बेची जाती है।
            माननीय मद्रास उच्च न्यायालय ने भी निर्णीत किया है कि मुद्रा चल-सम्पत्ति (chattel) नहीं होकर धन है और वह अपनी किस्म (Sui generis) की कोई वस्तु है (1951- 2 एसटीसी 167 मरियाला वेकटेश्वर राव - म.उ.न्या.) इसी प्रकार मुद्रा-नोट (प्रचलित) को भी माल नहीं माना गया है (1905 आई.एल.आर. 379 कलकत्ता इम्प्रेस बनाम जगोसुर)
            किन्तु अप्रचलित सिक्के विधिक मुद्रा (Legal Tender) नहीं होने के कारण ‘माल’ की श्रेणी में आते है।
            गुड्स एवं सर्विस टैक्स व्यवस्था में प्रतिभूति (security) को माल में सम्मिलित किया गया है।
            ‘‘प्रतिभूति’’ वह कोई चीज है जो धन को भुगतान की दृष्टि से अधिक सुगमता से वसूलीय बनाती है। प्रतिभूति में पर्सनल बांड या एफेडेबिट इत्यादि आते है जिनसे धन की वसूली की जा सकती है (ए.आई.आर. 1963 केरल पृष्ठ 134 पलई सेन्ट्रल बैंक बनाम जेकब पी. चेरियन कृपया सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम, 1882 की धारा 134 भी देखें)
            गुड्स एवं सर्विस टैक्स के उद्देश्य से उगती फसल (growing crops) भी माल है। ‘घास’ (द्दह्म्ड्डह्यह्य) और भूमि से बद्ध या उसकी भाग रूप वस्तुएं जिनको आपूर्ति (supply) के पूर्व या आपूर्ति की संविदा के अधीन अलग किये जाने का करार किया जाता है वे भी ‘माल’ के अन्तर्गत आती है।
            गुड्स एवं सर्विस टैक्स के उद्देश्य से, अमूर्त सम्पत्ति (intangible assets) को माल की परिभाषा से बाहर रखा गया है।
            सारांश में कहा जा सकता है कि उपरोक्त परिभाषा के अनुसार निम्न ‘‘माल’’ है-(1) प्रतिभूति (2) उगती फसल (3) घास और भूमि से संबद्ध कोई वस्तु जिसे आपूर्ति या आपूर्ति के संविदा के अधीन पृथक करने का करार हो (4) सभी चल सम्पत्ति (सिवाय अमूर्त सम्पत्ति के)
            ‘माल’ नहीं है - (1) एक्सनेबल क्लेम (2) बैंक नोट (3) चलने-सिक्के आदि (4) अमूर्त सम्पत्ति

   

प्रश्न-4

व्यक्ति (person) तथा कराधेय व्यक्ति (taxable person) की परिभाषाओं को विस्तार से समझाइये?

उत्तर

जीएसटी मॉडल लॉ, 2016 की धारा 2(74) के अनुसार ‘व्यक्ति’ के अन्तर्गत निम्न शामिल है-
            (a) व्यष्टिक (An individual)
            (b) हिन्दू अविभक्त परिवार (A Hindu unidivided family)
            (c) कम्पनी (company)
            (d) फर्म  (firm)
            (e) सीमित दायित्व वाली पार्टनरशिप (A limited liabity partnership)
            (f) भारत में या भारत के बाहर व्यक्तियों का समूह या व्यष्टियों का निकाय, चाहे निगमित हो या नहीं,
            (g) किसी केन्द्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा/या के अधीन स्थापित कोई निगम या सरकारी कम्पनी, जैसा कि कम्पनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2(45) में परिभाषित है,
            (h) भारत के बाहर देश की विधि द्वारा/या के अधीन निगमित कोई निगम निकाय,
            (i) सहकारी समिति से संबंधित किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत सहकारी समिति,
            (j) स्थानीय प्राधिकरण,
            (k) सरकार,
            (l) सोसाइटी जैसा कि सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, (1860 का 21) परिभाषित है,
            (m) न्यास, और (Trust)
            (n) Every artificial juridical person, not falling withing any of the preceding sub-clause)
व्यक्ति की उपरोक्त परिभाषा में निम्न सम्मिलित है:-  

 

1.

व्यक्ति (individual) एक अकेला व्यक्ति भी इस परिभाषा के अन्तर्गत आता है।

 

2.

हिन्दू अविभक्त परिवार (एचयूएफ) - हिन्दू अविभक्त परिवार न तो कोई फर्म है और न व्यक्तियों का समूह, बल्कि यह (एचयूएफ) स्वयं में एक पृथक अस्तित्व (entity) है (एआईआर 1974 उ.न्या. पृष्ट 457 आयकर अधिकारी गोरखपुर बनाम रामप्रसाद) हिन्दू अविभक्त परिवार (एचयूएफ) के अन्तर्गत एक जैन अविभक्त परिवार को भी माना गया है (ए.आई.आर. 1972 उ.न्या. 2119 पृष्ठ 2124 वैल्थ टैक्स कमिश्रर बनाम चम्पा कुमार सिंह)। हिन्दू अविभक्त परिवार एक प्रवध्यान निकाय (fleeting body) है, जिसका गठन जन्म, मृत्यु विवाह, विच्छेद आदि के साथ बदलता है (ए.आई.आर. 1970 उ.न्या. अग्रवाल एण्ड कम्पनी बनाम आयकर आयुक्त)

 

3.

कम्पनी - धारा 2(74) में दी गई ‘व्यक्ति’ की परिभाषा में कम्पनी भी सम्मिलित है। कम्पनी अधिनियम के अनुसार कम्पनी से आशय है कम्पनी अधिनियम के अधीन गठित और रजिस्ट्रीकृत कोई कम्पनी अथवा कोई विद्यमान कम्पनी। कम्पनी ऐसे व्यक्तियों का एक स्वैच्छिक समूह होता है जो किसी करार विशेष या समूह अनुच्छेद के अधीन एक साथ कोई व्यापार या कारबार चलाने के प्रयोजन से एक व्यक्ति निकाय या जमाव गठन के लिए एकत्र होते है और इस रूप में उन्हें एक कम्पनी के रूप में किसी कानून के अधीन मान्यता मिलती है, रजिस्ट्रीकृत किया जाता है या गठन किया जाता है (1961 आईएलआर 11 राज. 486 कंवर चन्द्रसिंह बनाम राजस्थान राज्य)

 

4.

फर्म (firm) - भागीदारी अधिनियम, 1932 की धारा 4 में ‘फर्म’ की परिभाषा इस रूप में दी गई है-    ‘‘भागीदारी ऐसे व्यक्तियों के बीच का संबंध है जो उन सभी के द्वारा या उनमें से किसी के द्वारा भी, सभी की ओर से कार्य करते हुए चलाये जा रहे कारबार के लाभों की हिस्सेदारी के लिए सहमत हुए है। जो व्यक्ति एक दूसरे के साथ भागीदारी करते है उन्हें व्यष्टिक रूप से (व्यक्गित रूप से) भागीदार कहा जाता है और संयुक्त रूप से ‘फर्म’ कहा जाता है और जिस नाम से उनका कारबार चलाया जाता है उसे फर्म-नाम कहा जाता है (कृपया बिजनस प्रोफिट टैक्स एक्ट, 1947 की धारा 2(10) देखें)
            ‘फर्म’ की अवधारणा का तत्व यह है कि वह ऐसे व्यक्तियों का एक सुविधाजनक नाम या वर्णन है, जो कोई संयुक्त प्रोद्यम (Joint venture) करने पर संयुक्त होते है (ए.आई.आर. 1963 मद्रास 292 मार्थवनन बनाम बाला सुब्रमण्यम)
            भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के अनुसार ऐसे व्यक्ति जिन्होंने एक दूसरे के साथ भागीदारी की है, सामूहिक यप से ‘फर्म’ कहलाते है (कृपया भारतीय संविदा अधिनियम 1872 की धारा 239 देखें)
            यदि कोई फर्म अपने नाम से अपना कारबार करने के लिए अनुज्ञात करती है तो वह (फर्म) उस कार्य का उत्तरदायित्व लेती है जो उसका प्रबंधक या कर्मचारी करता है (31 एमएलटी 104 पीसी)

 

5.

सीमित दायित्व भागीदारी (A Limited Liability Partnership)        
यह एक ऐसी भागीदारी होती है जिसमें भागीदारों का दायित्व सीमित होता है।

 

6.

भारत में या भारत के बाहर व्यक्तियों का समूह या व्यष्टियों का निकाय, चाहे निगमित हो या नहीं:- an association of persons or a body of individual, whether incorporated or not, in India or outside India -व्यक्तियों के समूह (Association of persons) तथा व्यष्टियों के निकाय (body of individuals) चाहे ऐसे समूह या निकाय भारत में हो या भारत के बाहर हो, निगमित हो या नहीं, मॉडल जीएसटी लॉ की धारा 2(74) के अर्थ में व्यक्ति (person) के अन्तर्गत आते है।
            किसी कानूनी परिभाषा के अभाव में समूह (Associations) शब्द को उसके सामान्य शब्दकोशीय अर्थ में लिया जाना चाहिये। इस संबंध में यह भी निर्णीत हो चुका है कि व्यक्ति-समूह के अन्तर्गत अवयस्क (Minor) भी आते है (1956-30 आईटीआर 61 पृष्ट 70 बुल्डाना डिस्ट्रिक्ट मैन क्लॉथ इम्पोर्टर्स बनाम आयकर आयुक्त)
            यह भी अभिनिर्धारित हुआ है कि व्यक्ति के समूह में प्रत्येक मनुष्य, हिन्दू अविभक्त परिवार, कम्पनी, फर्म और व्यक्तियों का अन्य समूह आता है (1939- 7 आईटीआर 369 आयकर आयुक्त बनाम अहमदाबाद मिल आनर्स एसोसियेशन)
            निकाय के न्यासियों को व्यक्तियों का समूह माना गया है (1993 - 3 आईटीआर 139 आयकर आयुक्त बनाम अबूबकर अब्दूल रहमान) इसी प्रकार को-आनर्स (Co-owners) को भी व्यक्तियों का समूह माना गया है। (1939-7 आईटीआर 225 आयकर आयुक्त बनाम एम.ए. बपोरिया) एक निर्णय में स्वयं में से एक के लिए सामान्य अभिधारियों के रूप में संपत्ति घारित करने वाले चार सह-स्वामियों को, उस संपत्ति के प्रबंध के लिए निर्धारण के प्रयोजनार्थ, व्यक्तियों का समूह (associations of persons) माना गया है - 1935-3 आईटीआर 408 बी एन इलियास इन री)

 

7.

कोई निगम (corporation) - किसी केन्द्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम के अधीन स्थापित कोई ‘‘निगम’’ भी व्यक्ति की परिभाषा में आता है। निगम से आशय कतिपय ऐसे अधिकारों को शाश्वत उत्तराधिकारी विहित करने के लिए स्थापित कृत्रिम व्यक्ति से है, जो नैसर्गिक व्यक्तियों को प्रदत्त होते है। निगम एक ऐसा निकाय है, जो किसी एकल व्यक्ति के रूप में कार्य करने के लिए प्राधिकृत होता है। निगम का अर्थ किसी केन्द्रीय या राज्य या प्रांतीय अधिनियम के अधीन स्थापित निगम से है - [ए.आई.आर. 1981 उ.न्या. 1395 पृष्ठ 1398 एसएस धानोस बनाम दिल्ली म्यूनिसेपलिटी-]

 

8.

सरकारी कम्पनी (Government Company) - कम्पनी अधिनियम, 2013 की धारा 2(45) में यथा परिभाषित सरकारी कम्पनी भी व्यक्ति की परिभाषा में आती है।

 

9.

निगम निकाय (Body corporate) -  भारत के बाहर से किसी देश की विधि द्वारा या विधि के अधीन निगमित कोई निगम निकाय (Body corporate) भी जीएसटी मॉडल लॉ की धारा 2(74) के अधीन दी गई ‘व्यक्ति’ की परिभाषा में आता है।

 

10.

रजिस्ट्रीकृत सहकारी समिति (Registered Co-operative Society) - सहकारी समिति से संबंधित किसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत सहकारी समिति भी ‘व्यक्ति’ की परिभाषा में आती है।
            कोई सहकारी समिति व्यक्तियों का एक ऐसा समूह होता है जिसका गठन सहकारी समितियों से संबंधित विधि के अधीन, किसी विशेष उद्देश्यों से किया जाता है और उसके सदस्यों के पारस्परिक  फायदे और सहयोग पर आधारित होता है - 1964-53 आईटीआर 241 सीआईटी बनाम कुम्बकोनम म्यूचअल बेनीफिट फण्ड लि. उ.न्या.

 

11.

स्थानीय प्राधिकरण (Local Authority) - यह एक ऐसा निकाय है जिसे स्थानीय सरकार के प्रशासन का कार्य सौंपा जाता है। कृपया ओसबोर्न की कन्साइस लॉ डिक्शनरी देखें-
            स्थानीय प्राधिकारी से अभिप्रेत है व्यक्तियों का कोई ऐसा निकाय जिसमें विधि द्वारा किसी विनिर्दिष्ट स्थानीय क्षेत्र के भीतर, किन्हीं भी विषयों/मामलों का नियंत्रण और प्रशासन विनिहित किया गया हो - केरल ट्रेस पास एक्ट 1871 की धारा 3
            साधारण खंड अधिनियम 1897 की धारा 2(31) में ‘‘स्थानीय प्राधिकारी’’ की परिभाषा इस रूप में दी गई है - 2(31) - ‘‘स्थानीय प्राधिकारी’’ से नगरपालिका समिति, जिला बोर्ड, पतन आयुक्तों की निकाय या अन्य प्राधिकारी जो नगर पालिका या स्थानीय निधि के नियंत्रण या प्रबंध का वैद्य रूप से हकदार है या जिसका नियंत्रण या प्रबंध सरकार द्वारा सौंपा गया (entrusted) है, अभिप्रेत होगा।
            यह महत्वपूर्ण है कि स्थानीय प्राधिकारी की उपरोक्त परिभाषा में पंचायत सम्मिलित नहीं है।

 

12.

सरकार (Government) - सरकार को भी ‘व्यक्ति’ की परिभाषा में सम्मिलित किया गया है।
            चूंकि ‘‘माल और सेवा की आपूर्ति’’ केन्द्र सरकार, राज्य सरकारों और उनके कार्यालयों और विभागों द्वारा किया जाना अपेक्षित है।
            अत: स्पष्ठता हेतु, लेखक की राय में जीएसटी मॉडल लॉ, 2016 की धारा 2(74)
            (द्म) निम्न प्रकार होनी चाहिये-
            w(|y) (K). "the central or any State Government or any of their Departments or offices."

 

13.

सोसाइटी (Society) - सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) में परिभाषित सोसायटी को भी व्यक्ति की परिभाषा में स्थान दिया गया है।

 

14.

न्यास (Trust) - इंडियन ट्रस्ट अनुसार न्यास, सम्पत्ति के स्वामित्व से उपोबद्ध एक ऐसा दायित्व है जो स्वामी द्वारा किये गये और स्वीकृत और किसी अन्य के तथा स्वामी के फायदे के लिए घोषित और स्वीकृत विश्वास से उत्पन्न होती है।

 

15.

कृत्रिम विधिक व्यक्ति (Artificial Judicial persons) - धारा 2(74) के खण्ड (क) से (ड) के अधीन नहीं आने वाले, कृत्रिम विधिक व्यक्ति को खण्ड (ढ) द्वारा ‘‘व्यक्ति’’ की परिभाषा में शामिल किया गया है। जिसका आशय यह है कि धारा 2(74) के खण्ड (ग) से (ड) में वर्णित हस्तियां (Entities) कृत्रिम व्यक्ति भी है। उदाहरण के लिए कोई निगम या कोई कम्पनी जिसमें विधिक शक्तियों और दायित्व निहित किये जाएं और जो अधिकारों और कर्तव्यों के अध्यधीन हो वह कृत्रिम व्यक्ति है और कोई हस्ती जो विधिक एन्टीटी (Entity) रखती हो और विधि द्वारा अधिकारों और कर्तव्यों के अध्यधीन मान्य हो, वह विधिक व्यक्ति है। इस प्रकार कृत्रिम विधिक व्यक्ति का आशय प्राकृतिक व्यक्ति से भिन्न हस्ती, जिसे किसी विधि के अधीन अधिकार, दायित्व और कर्तव्य प्राप्त हो, से है और वह भी गुड्स एवं सर्विस टैक्स की धारा 2(74)(ढ) के अनुसार ‘‘व्यक्ति’’ की परिभाषा में शामिल है।
            ‘‘कर योग्य’’ (Entities) को धारा 2(96) के अन्तर्गत निम्न प्रकार परिभाषित किया गया है- 2(96) - ‘‘कर योग्य’’ का अर्थ होगा, जो उसे इस अधिनियम (गुड्स एवं सर्विस टैक्स) की धारा 9 में समनुदेशित (assigned) है।
            जीएसटी मॉडल लॉ, 2016 की धारा 9(1) निम्नानुसार है:- कर योग्य व्यक्ति (1) कर योग्य व्यक्ति से वह व्यक्ति अभिप्रेत है, जो भारत/राज्य ..... में किसी स्थान पर कोई कारबार करता है और जो इस अधिनियम की अनुसूची 3 के अधीन रजिस्ट्रीकृत है या रजिस्ट्रीकृत किये जाने के लिए अपेक्षित है।

 

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