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HSN Code GST (in Hindi) (By Mr. Narendra Sharma)

Narendra Sharma
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Durga Prasad
Advocate
M : 9235718726
9/76, Arya Nagar, Kanpur
e-mail : narendra.advo@rediffmail.com
Website  : www.narendrasharmaandcompany.in

 

HSN Code  : GST

 

अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार में सुगमता के लिये, अनेक देशों गैर-सरकारी संगठनों के समूह ने वर्ष 1952 में Custom Co-operation Council  से प्रारम्भ कर इस दिशा में क्रमशः प्रगति करते हुए World Customs Organisation (WC0) 1988, के मुख्यालय की Belgium  की राजधानी Brussels  में स्थापना की।
लगभग 5300 वस्तुएँ/पदार्थ, 99 अध्याय, 21 सेक्शन में बांटते हुए HSN code  का वर्तमान स्वरूप है, इसमें समय-समय पर परिवर्तन भी होते रहते हैं। यह 2-8 अंकों होता है:-
HS-2:  Code के प्रथम 2 अंक Chapter number इंगित करते हैं।
HS-4: अगले 2 अंक Chapter के अंदर वस्तु का वर्गीकरण इंगित करते हैं।
HS-6: अगले 2 अंक उपवर्गीकरण इंगित करते हैं।
HS-8:  अन्तिम 2 अंक उपवर्गीकरण इंगित करते हैं।
भारत में अधिकांश राज्यों में VAT लागू करते समय HSN code  के आधार पर उत्पादों का वर्गीकरण किया, किन्तु GAT में वर्तमान व्यवस्था इस प्रकार है:-
1. 1.5 करोड़ से कम टर्नओवर वाले डीलर को उत्पाद को वर्गीकृत करने की आवश्यकता नहीं है।
2. 1.5 करोड़ से 5 करोड़ वाले डीलर 2 अंकों वाला HSN code  प्रयुक्त कर सकते हैं।
3. 5 करोड़ या उससे अधिक वाले डीलर 4 अंकों वाले HSN code  प्रयोग करेंगे।
4. आयातक एवं निर्यातक 8 अंकों के वर्गीकरण का प्रयोग करेंगे।

व्याख्या के सिद्धान्त : Principle of Interpretation
HSN code  में प्रत्येक अध्याय में यह स्पष्ट वर्णित है कि उसमें क्या सम्मिलित है, क्या नहीं सम्मिलित है? इसे Chapter Note कहते हैं। इसके अतिरिक्त इसे समझने के लिये अन्य के अतिरिक्त निम्नलिखित नियम हैं:-

 
Rule-1 : क्रमशः 2, 4, 6 तथा 8 अंक क्रमशः धारा/अध्याय/उप-अध्याय इंगित करते हैं।
   
Rule-2 : Heading और Sub-heading का देखा जाना आवश्यक है।
   
Rule-3 :
यदि उत्पाद अपूर्ण है किन्तु उसमें जिन उत्पाद के गुण हैं तो वे एक ही वर्ग/उपवर्ग में गिने जायेंगे।
   
Rule-4: Heading में SKD/CKD अर्थात Assembled Unassembled Parts भी समझे जायेंगे।
   
Rule-5:
किसी वस्तु या पदार्थ के उल्लेख से उसके सम्मिश्रण और अन्य के साथ सम्मिश्रण से प्राप्त पदार्थ को उसी में परिगणित किया जायेगा।
   
Rule-6: विशिष्ट प्रविष्टि सामान्य पर उपरिगामी प्रभाव रखेगी। A grooming kit consisting of electric hair clippers, a comb, and a brush inside a leather case should be classified under the electric hair clippers heading.
   
Rule-7: सम्मिश्रण के मूल गुणों के आधार पर होगा।
   
Rule-8:
यदि किसी वस्तु के वर्गीकरण दो एचएसएन कोड में संभव दिख रहा है तो उसे वरीयता दी जायेगी जिसमें अन्तिम दो अंक अधिक हो जैसे-.30 तथा .20 को वरीयता मिलेगी।
   
Rule-9:
यदि कोई वस्तु उक्त नियमों के अन्तर्गत वर्गीकृत किया जाना संभव नहीं है तो उसके वर्गीकरण का आधार उससे मिलती-जुलती दूसरी वस्तु के लिये किया जा सकता है।
   
Rule-10: परिवहन में स्थायी प्रयोग हेतु कंटेनर का वर्गीकरण उस वस्तु के आधार पर ही होगा जिसका परिवहन कंटेनर द्वारा किया जाता है।
   
Rule-11: यदि पैकिंग वस्तु पुनः-पुनः प्रयोग में नहीं लायी जायेगी तो पैकिंग मैटेरियल एवं कंटेनर का उन वस्तुओं के साथ ही वर्गीकरण किया जाना चाहिये।
   
Rule-12: यदि 2/4/6 अंकों की प्रविष्टि में कोई वस्तु एक से अधिक बार सम्मिलित प्रतीत हो रही है तो उसका निर्धारण ejusdem generis के सिद्धान्त से होगा।

The Latin expression “ejusdem generis” which means “of the same kind or nature” is a principle of construction, meaning thereby when general words in a statutory text are flanked by restricted words, the meaning of the general words are taken to be restricted by implication with the meaning of restricted words.

 
 
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